
कवर्धा।
राज्य सरकार भले ही पूरे प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान चलाकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। कवर्धा शहर से सामने आया एक वीडियो जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में महज 7 साल का मासूम बच्चा खुलेआम सिगरेट पीते नजर आ रहा है—वो भी पूरे ठसक के साथ धुएं के छल्ले उड़ाते हुए।
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यह चौंकाने वाला मामला शहर के बस स्टैंड क्षेत्र का बताया जा रहा है। जिस उम्र में बच्चे के हाथ में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए, उस उम्र में वह चाय की चुस्की के साथ सिगरेट का कश ले रहा है। यह दृश्य न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उस बच्चे को सिगरेट बेचने वाला दुकानदार कौन है? क्या उसे कानून का डर नहीं? और अगर नहीं, तो क्यों? क्या प्रशासन की ढिलाई ने ऐसे लोगों के हौसले बुलंद कर दिए हैं?
यह कोई एक मामला नहीं है। शहर के कई इलाकों में चोरी-छिपे नाबालिग बच्चों को नशे की सामग्री बेची जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। न तो सख्त कार्रवाई हो रही है और न ही किसी तरह की निगरानी दिखाई दे रही है।
स्थिति यह है कि “नशा मुक्त अभियान” सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित नजर आ रहा है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो आने वाले समय में यही बच्चे नशे की गिरफ्त में आकर समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन आखिर कब जागेगा? या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही कार्रवाई की परंपरा यहां भी दोहराई जाएगी?





