कवर्धाछत्तीसगढ़

कवर्धा में गोंडवाना संस्कृति का भव्य संगम: 42 जोड़े बंधे विवाह बंधन में, परंपराओं की दिखी अद्भुत छटा

कवर्धा। गोंडवाना समाज की समृद्ध परंपरा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत की अनुपम झलक कवर्धा शहर के पीजी कॉलेज ग्राउंड में देखने को मिली, जहां गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के बैनर तले दो दिवसीय भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष गोंडी परंपराओं के अनुसार 42 जोड़े विवाह बंधन में बंधे और अपनी नई जीवन यात्रा की शुरुआत की।
यह सामूहिक विवाह पूरी तरह से गोंडवाना समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पहले दिन ‘चुलमाटी’, ‘तेल’ और ‘मायन’ जैसी पारंपरिक रस्मों के साथ हुआ, जो गोंडी संस्कृति में शुद्धिकरण और मंगल की प्रतीक मानी जाती हैं। दूसरे दिन ‘चिकट’, ‘बारात’ और ‘टिकावन’ जैसी प्रमुख विवाह रस्में पूरे विधि-विधान और पारंपरिक गीतों के साथ निभाई गईं। ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वेशभूषा और गोंडी विवाह गीतों ने पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
पूरा विवाह समारोह परम श्रद्धेय गोंडवाना गुरुदेव दुर्गेभावत जगत सिदार एवं गुरुमाता दुर्गे दुलेश्वरी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिनके मार्गदर्शन में सभी 42 जोड़ों ने गोंडी परंपरा अनुसार सप्तपदी लेकर एक-दूसरे का जीवनसाथी बनने का संकल्प लिया।IMG_7894
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी सहित भाजपा के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। सभी ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
गौरतलब है कि गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति द्वारा पिछले 20 वर्षों से सामूहिक विवाह का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इस वर्ष उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सभी 42 जोड़ों को 35-35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, साथ ही वर-वधुओं को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश, उड़ीसा और महाराष्ट्र से भी गोंडवाना समाज के प्रमुख लोग शामिल हुए। बारात में पारंपरिक बाजा-गाजा के साथ समाज के लोग झूमते नजर आए, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्सव का माहौल बना रहा।
गोंडवाना समाज के गुरुदेव दुर्गेभावत जगत सिदार ने बताया कि सामूहिक विवाह का उद्देश्य समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और अनावश्यक खर्चों से बचाना है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में गरीब परिवारों को विवाह के लिए कर्ज लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी, लेकिन सामूहिक विवाह ने इस बोझ को काफी हद तक कम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि समाज के उत्थान के लिए उन्होंने अपने नौकरी के दौरान दो वर्षों का वेतन और वर्तमान में हर वर्ष एक माह की पेंशन समाज को समर्पित करते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी शिक्षित और सशक्त बन सके।
इस तरह यह सामूहिक विवाह न केवल 42 जोड़ों के जीवन की नई शुरुआत बना, बल्कि गोंडवाना समाज की संस्कृति, एकता और सामाजिक सहयोग की मिसाल भी पेश कर ल

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