जंगल सफारी शुभारंभ से पहले सियासी विवाद, जिला प्रसाशन की बड़ी चूक पढ़िए पूरी खबर

प्रदीप गुप्ता,कवर्धा, कबीरधाम जिले में भोरमदेव अभयारण्य जंगल सफारी के शुभारंभ को लेकर जहां एक ओर उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर एक बड़ी प्रशासनिक चूक ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। जंगल सफारी के उद्घाटन के लिए छपे आमंत्रण पत्र में पंडरिया विधायक भावना बोहरा का नाम शामिल नहीं होने से नाराजगी और सवाल दोनों खड़े हो गए हैं।

आमंत्रण पत्र में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद संतोष पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम तो प्रमुखता से दर्ज हैं, लेकिन उसी जिले की विधायक का नाम गायब होना चर्चा का विषय बन गया है।
इसे केवल एक चूक मानने के बजाय स्थानीय लोग इसे जनप्रतिनिधि के अपमान और पंडरिया विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह मामला और भी तूल पकड़ता दिख रहा है, खासकर उस समय जब महिलाओं के सम्मान और भागीदारी को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। ऐसे में एक महिला विधायक की अनदेखी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। अब यह लापरवाही है या जानबूझकर किया गया कृत्य—यह जांच का विषय बन गया है।
इधर, प्रकृति प्रेमियों के लिए यह खबर राहत भरी है कि भोरमदेव अभयारण्य में जंगल सफारी का शुभारंभ होने जा रहा है। करीब 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में 35 किलोमीटर लंबा सफारी रूट तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा क्षेत्र में बनाया गया है, जहां से पर्यटक प्रवेश करेंगे।

पर्यटकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था भी की गई है। शुरुआती चरण में 3 सफारी वाहन उपलब्ध रहेंगे, जिनमें एक वाहन में 6 पर्यटक गाइड और ड्राइवर के साथ सफर कर सकेंगे। इस रोमांचक सफारी के दौरान घने जंगल, पहाड़, झरने और नदी-नालों का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि सफारी रूट में एक संकरी नदी को लगभग 22 बार पार करना होगा, जो इसे और भी रोमांचक बनाता है।
भोरमदेव अभयारण्य वन्यजीवों की दृष्टि से भी समृद्ध है। यहां टाइगर, तेंदुआ, हिरण, भालू, नीलगाय और सांभर जैसे वन्य प्राणी पाए जाते हैं। हाल ही में टाइगर और तेंदुए की गतिविधियां कैमरे में कैद होने से इस क्षेत्र का आकर्षण और बढ़ गया है।
अब देखना होगा कि भव्य शुभारंभ से पहले उठे इस विवाद पर जिला प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।





