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दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से महिला श्रमिकों को आत्मनिर्भरता की नई राह

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की पहल, जिले में 87 श्रमिक लाभान्वित

बेमेतरा – छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना महिला निर्माण श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य पंजीकृत महिला श्रमिकों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार लाना है। जिले में अब तक 87 महिला श्रमिकों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया जा चुका है, जिससे वे स्वयं ई-रिक्शा का संचालन कर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर रही हैं।

योजना अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की वे महिला निर्माण श्रमिक पात्र हैं, जो मंडल में न्यूनतम तीन वर्षों से पंजीकृत हों। पात्र महिला हितग्राही को ई-रिक्शा का संचालन स्वयं करना अनिवार्य है, जिससे वास्तविक स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, बल्कि समाज में उनकी सहभागिता और आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। योजना के तहत ई-रिक्शा के क्रय मूल्य का 60 प्रतिशत या अधिकतम ₹1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपये)जो भी कम हो अनुदान स्वरूप प्रदान किया जाता है। यह राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है। शेष राशि बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है, जिसके लिए संबंधित बैंक से स्वीकृति आवश्यक है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एवं दस्तावेज आवेदन

हितग्राही योजना के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की मूल स्कैन प्रति प्रस्तुत करना अनिवार्य है जिसमे श्रमिक पंजीयन कार्ड, बैंक से ऋण स्वीकृति संबंधी दस्तावेज, बैंक पासबुक की मूल स्कैन प्रति, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, शासन द्वारा निर्धारित प्रारूप में नियोजक संबंधी स्व-घोषणा प्रमाण पत्र, वाहन की आरसी बुक (पंजीयन प्रमाण पत्र) शामिल हैं | योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले की अनेक महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाकर अपने परिवार की आय में वृद्धि की है। कई महिला हितग्राहियों ने बताया कि ई-रिक्शा संचालन से उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला है, जिससे वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से कर पा रही हैं।

प्रशासन द्वारा पात्र श्रमिकों से अपील की गई है कि वे योजना का अधिकतम लाभ उठाएं तथा समय पर आवेदन कर स्वावलंबन की दिशा में कदम बढ़ाएं। यह योजना महिला सशक्तिकरण, हरित परिवहन को बढ़ावा तथा शहरी-ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

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