पेनाल्टी के बावजूद ईंट का निर्माण बदस्तुर जारी

नियम में ताक में रखकर चलाया जा रहा है इट भट्ठा संचालक
बेमेतरा – पर्यावरण विभाग के नियमों को ताक पर रखकर ग्राम पंचायत ताला के आश्रित ग्राम ढोकला मे करोड़ों की लागत से नवनिर्मित ओपन जेल से करीब 90 मीटर की दूरी पर चिमनी ईट भट्टा संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जो पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है। इसके अलावा एनओसी
लेने को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों को आर्थिक प्रलोभन दिया गया। वही ईट भट्ठा संचालन क्षेत्र के सीमांकन को लेकर रेवेन्यू अधिकारी संतोष जनक जवाब नहीं दे रहे हैं जिसमें पटवारी व राजस्व निरीक्षक शामिल है। इसके विपरीत ईट भट्ठा संचालक प्रतिनिधि भरत सांहू ने बताया कि सीमांकन की रिपोर्ट पटवारी व राजस्व निरीक्षक की ओर से तहसीलदार को सौंपी गई है, जिसमें रिहायसी इलाका, स्कूल, गांव आदि की दूरी शामिल है। जो पर्यावरण मानकों के तहत है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिना अनुमति ईट निर्माण की शिकायत पर खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग व पटवारी की संयुक्त टीम जांच के लिए ग्राम ढोकला स्थित चिमनी ईट भट्ठा पहुंची। यहां शिकायत सही पाए जाने पर संचालक के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपए पेनाल्टी लगाई गई थी, बावजूद ईट का निर्माण बदस्तूर जारी है।
एनओसी क्षेत्र से अधिक भूमि पर ईट का निर्माण
ग्राम पंचायत ताला के तात्कालिक सचिव टीकम वर्मा ने बताया कि ईट भट्ठा संचालक की ओर से 2 हेक्टेयर में ईट भट्ठा संचालन के लिए एनओसी मांगी गई थी। इस संबंध में पंचायत की ओर से 3 बार बैठक बुलाई गई थी, अंतत: पंच, उपसरपंच व सरपंच की सहमति से एनओसी जारी की गई। लेकिन एनओसी क्षेत्र से अधिक भूमि पर ईट का निर्माण कर डंप करने की सूचना मिल रही थी। वर्तमान में निनवा पंचायत में पदस्थ हूं, ग्राम पंचायत ताला (ढोकला) के वर्तमान सरपंच विवेक दीवान को ईट भट्ठा कार्यक्षेत्र की जांच कर फिर से एनओसी निर्धारण की बात कही थी।
ग्रामीणों को विश्वास में लिए बिना जारी की एनओसी
ग्राम पंचायत ताला (ढोकला) के ग्रामीणो ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एनओसी के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया गया, कई बैठकों में इस मुद्दे को रखा गया, जिसे खारिज कर दिया गया था। आर्थिक प्रलोभन के सामने कई पंचायत प्रतिनिधि एनओसी देने को राजी हुए और बिना जांच पड़ताल के ईट भट्ठा संचालक को एनओसी जारी कर दी गई, गौरतलब हो कि यहां ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया।
चिमनी ईट भट्टा लाइसेंस के लिए यह प्रक्रिया जरुरी
मिली जानकारी के अनुसार चिमनी ईंट भट्ठा के संचालन के लिए सबसे पहले पर्यावरण (ईसी) प्रदूषण सर्टिफिकेट, फिर सीटीएस (कांस्टेंट टू स्टैबलिस्ट), सीटीओ (कांस्टेंट टू ऑपरेट) आदि प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत पड़ती है। इसके लिए ईंट भट्ठा संचालक को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से सबसे पहले पर्यावरण प्रदूषण सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। सीटीओ प्रमाण पत्र लेने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अप्लाई करना पड़ता है।
रिहायशी इलाकों से 500 मीटर से अधिक दूरी अनिवार्य
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के ईंट भट्ठा (चिमनी भट्टा) संचालन के नियमों के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिग-जैग (ईट सजाने का तरीका) तकनीक अनिवार्य है। भट्ठों को रिहायशी इलाकों, नदियों और स्कूलों से 500 मीटर से अधिक दूर होना चाहिए। साथ ही संचालन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैध लाइसेंस/सीटीओ (संचालन की अनुमति) और मिट्टी खनन की अनुमति आवश्यक है।
सीधी बात
भरत साहू- ईट भट्टा संचालक प्रतिनिधि
प्रश्न – ईट भट्ठा निर्माण के लिए ली गई एनओसी पर सवाल उठ रहे हैं?
उत्तर – नियमानुसार एनओसी ली गई है, जिसमें सभी पंच, उपसरपंच व सरपंच के हस्ताक्षर है।
प्रश्न – 2 हेक्टेयर भूमि के लिए एनओसी लेकर दोगुना से अधिक जमीन पर कार्य किया जा रहा है?
उत्तर – इस पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
प्रश्न – एरिगेशन विभाग के बांधा जलाशय के पार से व्यवसायिक प्रयोजन के लिए आपके वाहनों की आवाजाही हो रही है?
उत्तर – इस बांधा पार पर पहले से ही ग्रामीण आवागमन कर रहे है, इसलिए मै भी इस मार्ग का उपयोग कर रहा हूँ।
प्रश्न – नवनिर्मित ओपन जेल से महज 80 से 100 मीटर की दूरी पर आपके चिमनी ईट भट्टा का कार्य क्षेत्र है, जो एनजीटी के नियमों का खुला उल्लंघन है?
उत्तर – इसके लिए तहसीलदार व पटवारी से एनओसी मिली हुई है।
वर्सन
बाँधा के पार को बतौर सड़क के रूप मे उपयोग करने की जानकारी आपसे मिल रही है, मौका निरीक्षण के लिए विभाग की टीम को भेजा जाएगा, शिकायत सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सिहोरे – ईई जल संसाधन विभाग
वर्सन





